कोई राह आसान नही है ना है कुछ भी मुश्किल,गर ललक है पाने की तो मंजिल मिलेगी निश्चित

Pages

09 October 2022

प्रताड़ना-पुरुष वर्ग की बेबसी ! जरा सोचिये.....

घर में चीखती-चिल्लाती, कलेश करती पत्नी, ऑफिस में बेइज्जत करती महिला बॉस, माँ की डांट-फटकार, बहन से लड़ाई-झगड़ा, पिता से जूते-बेल्ट से मार, माँ-बाप दोनों द्वारा बहन की पक्षकारी व परोपकारी, गर्ल-फ्रेंड की दुत्कार आदि न जाने कितने ही रूपों में पुरुष प्रतिदिन, गाहे-बगाहे, वजह-बेवजह, यहाँ-वहाँ सब जगह प्रताड़ित होते रहते है।
मगर उनकी बेबसी यह है की वो अपनी व्यथा किसके सामने किस तरीके से तथा किस रूप में बयान करें ?
क्योंकि वह तो मर्द,सर्व शक्तिमान पुरुष है,बिल्कुल निडर है। वह तो हमारी पुरुष-प्रधान संस्कृति के चलते सर्वश्रेष्ठ रूप में शासक है। उनका भला कौन शोषण कर सकता है ?
वह तो स्वयं अत्याचारी है-भला उन पर कौन अत्याचार कर सकता है। वह तो घर का मुखिया है-भला उन्हें कौन आदेश पारित कर सकता है। वह तो घर का "लाडला-राजा बेटा" है तो भला लड़की उससे श्रेष्ठ और बेहतर कैसे हो सकती है ? और सर्वोपरि वह पुरुष है-तो भला औरतों की तरह कैसे अपना दुखड़ा रो सकता है क्योंकि रोना-धोना,व्यथा का बखान करना, बेचारगी प्रदर्शित करना तो स्त्रियोचित स्वभाव है। पुरुषोचित स्वभाव तो बस अडिग, निडर, साहसी, शक्तिमान- शासक बने रहना ही है।चाहे यह बस एक खोखला दिखावा या मिथ्या आडम्बर ही क्यों न हो।
क्या पुरुष अपनी व्यथा-दुःख किसी के सामने ज़ाहिर कर सकते है ?
क्या वास्तव में पुरुष कभी अपमानित या प्रताड़ित नही होते ?

जरा सोचिये..... 

Team Udan 
दर्शना अर्जुन "विजेता"
उड़ान,द रियल स्टोरी शो@जरा सोचिये