परन्तु क्या कभी किसी ने इस पुरुष-प्रधान समाज में एकदम बेखौफ,सर्वशक्तिशाली,निडर माने गए पुरुष के साथ पार्श्व में हो रही प्रताड़ना को जानने समझने की कोशिश की है? घरों में, दफ्तरों में, शहरों-बाज़ारों में, स्कूल-कालेज में, किसी कार्यस्थल पर पुरुषो के साथ कैसा व्यवहार होता है किस प्रकार दहेज प्रताड़ना, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न, छेड़-छाड़, मारपीट आदि का झूठा केस बनाकर पुरुष-वर्ग को बेवजह फंसाया जाता है।स्कूल, कालेज, दफ्तर अथवा किसी भी कार्यस्थल पर महिला द्वारा मिथ्यारोपण कर उनकी ज़िन्दगी या कैरियर अथवा पढाई तबाह-ओ-बर्बाद कर दी जाती है।
कोई महिला बिना किसी सबूत के अगर किसी पुरुष के खिलाफ़ कहीं पर केवल शिकायत भी कर दे तो पुरुष पक्ष कितनी भी सफाई, कितनी भी दलीलें, कितने भी गवाह-साक्ष्य आदि प्रस्तुत कर से मगर उसकी कोई सुनवाई नही है। कभी-कभी पुरुष का पूरा परिवार-रिश्तेदार सभी उस झूठे केस में फंसा दिए जाते है जो जुर्म कभी उन्होंने किये ही नही थे। आर्थिक व सामाजिक प्रतिष्ठा की अतिरिक्त हानि भी होती है। केस बनाने, केस दबाने, रफा-दफा करवाने के एवज में पुरुष वर्ग से समझौते के नाम पर लाखों-करोड़ो रुपये ऐंठ लिए जाते है।अथवा उसे जेल में डाल दिया जाता है।
यह एक वाद-विवाद का विषय है की इतने निडर, सर्वशक्तिमान, पुरुष वर्ग को भी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। क्या प्रताड़ित पुरुष को भी स्त्री के विरुद्ध विधि-सम्मत अधिकार मिलने चाहिए ?
क्या पुरुषों के लिए भी स्त्रियों के समान शोषण के विरुद्ध परिवाद के लिए कानून बनाया जाना चाहिए?न्यायालयों में द्विपक्षीय बहस के बाद ही पीड़ित अथवा पीड़िता घोषित किया जाना चाहिए?
जरा सोचिये.....
दर्शना अर्जुन "विजेता"
Team Udan
उड़ान,द रियल स्टोरी शो@जरा सोचिये
