ये सुरक्षाकर्मी अपने घर-परिवार ,माँ-बाप,बीवी-बच्चों,नाते-रिश्तेदारों,सभी से कोसो दूर आठ घंटो की बजाय बारह से अट्ठारह घंटो की नौकरी करते निभाते, कभी-कभी तो लगातार 24 घंटे नौकरी पर तैनात कर दिए जाते है,छुट्टी और आराम के लिए तरसते ये सुरक्षाकर्मी केवल नाम मात्र की तनख्वाह या कहें कि मजदूरी के लिए अपने शरीर को असमय बुढ़ाते जाते है, इसलिए कभी-कभी अति चीड़चिड़े, गुसैल,बदजुबान,बदमिजाज़ या फिर झगड़ालू स्वाभाव के बन जाते है।
कभी नींद पूरी न होने पर "आन" ड्यूटी सोते हुए भी मिल जाते है या फिर थकान दूर करने के प्रयास में बीड़ी,सिगरेट,पान,तम्बाकू,गुटखा आदि तथा कभी-कभी एक आध बार देशी शराब का अद्धा-पौवा भी पी लेते है, कभी हमदर्दी-पूर्वक,प्रेम-स्नेह से इनसे बात करके देखिये किस प्रकार इनका गुस्सा,बेबसी,फूट-फूट कर बाहर निकलता है।
अगर कभी हमदर्दी या स्नेहवश इनको कुर्सी पर बैठने के लिए कह दो तो बड़ी पीड़ा और लाचारी भरी आँखों से देखते हुए कहते है- मैडम ! " सुपरवाइजर ने देख लिए तो नौकरी चली जायेगी।"
इतनी कर्तव्य-परायणता से जिम्मेदारियों का वहन करने पर भी इन्हें तुच्छ,चतुर्थ-श्रेणी का नौकर समान ही समझा जाता है। ड्यूटी के दौरान कर्तव्य निर्वहन के अन्तर्गत थोड़ा भी सख्त होने पर या फिर बेवजह किसी व्यक्ति विशेष के अहंकारी स्वाभाव के परिणाम स्वरुप आखिरकार इन्हें क्या मिलता है?.....बस एक मुट्ठी भर अपर्याप्त वेतन,लोगों की गालियाँ,अपमानजनक व्यवहार,ज़लालत,रसूखदार औरतों-पुरुषों द्वारा चप्पल-जूतों द्वारा शारीरिक उत्पीड़न ,मानसिक उत्पीड़न, दण्ड स्वरुप सेवा मुक्ति....आदि-आदि
क्या इस प्रकार की विपरीत स्थितियों, प्रतिकूल वातावरण और दूषित व्यवहार के चलते हमारे ये सुरक्षाकर्मी वास्तव में हमारी सुरक्षा करने लायक रह पायेंगे या इनकी सुरक्षा के लिए हमें भी कुछ कायदे-क़ानून नियम बनाने पड़ेंगे।
जरा सोचिये....
दर्शना अर्जुन "विजेता"
Team Udan
उड़ान,द रियल स्टोरी शो @ जरा सोचिये.....
