एक किसान की गर्भवती लड़की पर सूदखोर महाजन के लोगों ने ट्रेक्टर चढ़ा कर मार डाला, गर्भवती महिला का जबरन गर्भपात क्योंकि भ्रूण एक कन्या थी, नवजात कन्या का कूड़ेदान पर / में मिलना, अबोध (एक वर्ष से बारह वर्ष) बच्ची से जबरन बलात्कार कर मार देना, परिवार जनों के आदेश उल्लघन करने पर स्वामित्व हत्या (ऑनर किलिंग) या फिर सामाजिक इज्जत की दुहाई देते हुए जवान लड़की को परिवार द्वारा ही जलाकर मार देना......आदि-आदि।
न जाने कितनी ही खबरें अख़बारों के समाचारों की सुर्खियाँ बनती है। जागरूक लोग इन सबके विरुद्ध क्रान्ति का बिगुल बजाते हुए विरोध-प्रदर्शन आदि भी करते है। न जाने कितने ही आदर्शवादी लेख इन घटनाओं की निंदा करते हुए छपते है। जिनके तथाकथित लेखकों को नारी-सम्मान पुरस्कार से भी नवाज़ा जाता है।
परन्तु क्या जन्मी या अजन्मी बेटी इतने भरसक प्रयत्नों के उपरान्त अभी तक सुरक्षित हो सकी है।जरा सोचिये......
जब बेटी को पैदा करने वाली बेटी को ही हम नही बचा पा रहे तो :- बेटी पैदा ही कैसे होगी, बेटी बचेगी कैसे- बेटी बढ़ेगी कैसे.......पढ़ना तो दूर की बात है....।
जरा सोचिये........
दर्शना अर्जुन "विजेता"
Team Udan
उड़ान,द रियल स्टोरी शो @ जरा सोचिये
