कोई राह आसान नही है ना है कुछ भी मुश्किल,गर ललक है पाने की तो मंजिल मिलेगी निश्चित

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28 September 2022

खुले में शौच....शौक या मजबूरी ? जरा सोचिये !

रेलवे की पटरियाँ,खेतो की हरी-भरी क्यारियां,नदी के किनारे,झुग्गी-झोपड़ियों के नज़दीक कूड़े के ढेरों पर या फिर किसी गावँ व अर्ध-विकसित अथवा अल्प-विकसित शहरों के किनारे ..........जहाँ देखो वहाँ  शौच ही शौच, निरी दुर्गन्ध ही दुर्गन्ध। 

वायु-पृथ्वी प्रदुषण का एक आवश्यक तत्त्व है- खुले में विसर्जित मल-मूत्र। 

गावं,कस्बा और शहर में झुग्गी झोपड़ी,पक्के मकान,बड़े-बड़े आलीशान सभी तरह के घर होते है फिर भी हमें लोग खुले में शौच करते दिख जाते है और ये खुले में शौच करने वाले लोग इन्ही छोटे-बड़े घरों के होते है। 

केवल दो गज-ज़मीन में बनने वाला शौचालय पता नही क्यों और किस अंधविश्वास के अंतर्गत नदारद है? सरकारी अनुदान एक और एक से ज्यादा बार लेकर भी कुछ घरों में शौचालय का निर्माण अभी तक नही कराया गया।जबकि नियम के मुताबिक खुले मे शौच करते हुए पकड़े जाने पर 100 से 500 रुपए तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

कहीं खुले में शौच करना इन लोगों का शौक तो नही बन गया है ?

जरा सोचिये.......      

दर्शना अर्जून "विजेता"


Team Udan

उड़ान द रियल स्टोरी शो @ जरा सोचिये