अमिताभ बच्चन जी के किसी फिल्म का एक संवाद था " दुनिया में दो तरह के काकरोच होते है........."। इसी प्रकार से हमारे भारत में दो नही अपितु कई प्रकार के विद्यालय होते है जैसे-एक तरफ बड़ी-बड़ी आलीशान इमारतों में सभी आधुनिक सुख-सुविधाओं युक्त एक वैभवशाली माल-तरीके विद्यालय जिसमें अगर हम और आप जैसा कोई व्यक्ति अगर चला भी जाए तो एकदम स्वर्ग जैसी आनंदानुभूति होगी जिसमे बच्चों की पढाई के साथ खाने,पीने,सोने तथा चिकित्सा तक की सभी सुविधा मुहैया होती है। और दूसरी तरफ मध्यमवर्गीय प्राइवेट और सरकारी विद्यालय जिनमे टूटी-फूटी ईमारत, चरमराया हुआ फर्नीचर तथा "शिक्षक परीक्षा" उत्रिंर्ण किये योग्य-अयोग्य अध्यापक। किसी प्रकार से बच्चों की औपचारिक शिक्षा पूरी हो जाए बस !
इन सबसे इतर एक यह विद्यालय है जहाँ न तो कोई छत है, न कोई फर्नीचर है,न ही पर्याप्त अध्यापक है,पठन-पाठन सामग्री भी नही है, इसे विद्यालय तो क्या एक कक्षा का भी नाम नहीं दिया जा सकता है।
क्या इनमे से कोई बच्चा डॉक्टर ,इंजिनियर,उद्योगपति,बड़ा नेता, वैज्ञानिक या फिर ऐसा ही कोई बड़ा नामधारी या पदनामधारी बन पायेगा.....?
वैसे लाल तो अभाव में भी पलकर और पढ़कर अपना मुकाम हासिल करते है।
क्या ऐसे बच्चे पढेंगे ?
जहाँ शिक्षा देने के लिए उपयुक्त स्थान नही है,योग्य अध्यापक नही है, पर्याप्त विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, खाने के लिए भोजन,पीने के लिए पानी और पहनने के लिए कपड़े नही है। पढाई के लिए है तो खुला आसमान, नंगी ज़मीन, अपर्याप्त पठन-पाठन सामग्री, आधे भूखे पेट,प्यासा मन ,आधा ढका तन,तंगहाल आर्थिक स्थिति।
इस प्रकार भारत के बच्चों को आगे बढ़ना तो दूर पढ़ना तक मुहाल है !
जरा सोचिये..........!
Team Udan
दर्शना अर्जुन "विजेता"
सरकार को शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की ज़रूरत है।और यदि सरकार के वजाय यह प्रयास किसी व्यक्ति विशेष, समूह या NGO का है जो शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में काम कर रहें है तो यह कार्य वाकई काबिले तारीफ है। और हम सभी को साथ मिलकर इनकी सहायता के लिए आगे बढ़ना चाहिए !@Join Us@Udan, The Real Story Show@7428718199
Team Udan
Harshit M.Tripathi


